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शक्ति का
केंद्र बनने हेतु अपनी जड़ें मजबूत बनाये वैश्य समाज:
रोशय्या
F-1
हैदराबाद:
वैश्य समाज के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. के
रोशय्या ने वैश्य समाज के सभी घटकों में एकता कायम कर उन्हें
एक मंच पर लाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वैश्य
समाज को अगर एक शक्तिशाली समुदाय के रूप में उभरना है, तो
उसे भविष्य के लिए कार्ययोजना तैयार कर एक रणनीति के तहत
एकजुट होकर कार्य करना होगा। दिनांक 19-20 फरवरी को
हैदराबाद में लोअर टैंकबंड स्थित होटल एक्सपोटल में आयोजित
किये जा रहे अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन की दो दिवसीय
चिंतन बैठक के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में
भाग लेते हुए श्री रोशय्या ने कहा कि अगर वैश्य समाज को
ताकतवर बनना है, तो उसके एक लक्ष्य बनाकर योजनाबद्ध तरीके
से कार्य करना होगा। यही नहीं उसे समाज के सभी घटकों को
साथ लेकर एकजुट होकर कार्य करना होगा, तभी सफलता प्राप्त
होगी और समाज का महत्व बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि समाज को
सिर्फ अपनी गतिविधियों को देश के विभिन्न क्षेत्रों तक
फैलाने तक ही सीमित न रखते हुए अपनी जड़ों को भी मजबूत बनाने
का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें समाज के सभी
वर्गों तक पहुंचने तथा उनमें अपनी जगह बनाने का प्रयास करना
चाहिए।
उन्होंने कहा
कि अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.
गिरीश कुमार संघी समाज को मजबूत बनाने हेतु अच्छा प्रयास कर रहे
हैं, लेकिन इस दिशा में और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है।
महासम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गिरीश कुमार संघी ने बैठक
की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वैश्य समाज में एकता का अभाव होने
हे कारण उसे वह महत्व नहीं मिल पा रहा है, जिसका वह हकदार है।
उन्होंने कहा कि एकता का अभाव होने के कारण ही वैश्य समाज
राजनीतिक क्षेत्र में सफल नहीं हो पा रहा है। उन्होंने पूर्व
मुख्यमंत्राी के. रोशय्या का उदाहरण देते हुए कहा कि चूंकि श्री
रोशय्या वैश्य समाज से संबंध रखते हैं और इस समाज का राजनीतिक
क्षेत्रा में प्रभाव कम है, इसलिए इन्हें उनका कार्यकाल पूरा
होने से पहले ही पद से हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि अगर
वैश्य समाज संगठित होता, तो यह परिस्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।
उन्होंने कहा कि यह बात रोशय्या तक ही सीमित नहीं है तथा वैश्य
समाज को हर क्षेत्रा में संगठित न होने के कारण नुकसान उठाना
पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि वैश्य समाज काफी सक्षम समाज है, लेकिन इसके
बावजूद देश में क्षमता को नकार कर जाति को प्राथमिकता दी जा रही
है। उन्होंने कहा कि हमें इस विषय पर गंभीरता से चिंतन करने की
आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दुबई में समाज की 100 से 200
संस्थाएं कार्य कर रही हैं तथा उन्होंने हाल ही में अपने दौरे
के दौरान वहां के सभी संगठनों से एक मंच के तहत कार्य करने का
आग्रह किया, जिसे उन्होंने मान लिया है। उन्होंने कहा कि
उन्होंने हाल ही में मॉरिशस का दौरा किया था तथा वहां के
राष्ट्रपति व प्रधनमंत्री अपने आप को कट्टर वैश्य मानते हैं।
यही नहीं मंत्रिमंडल के कई सदस्य वैश्य समाज से संबंध रखते
हैं। उन्होंने कहा कि वहां की जनसंख्या में से 80 प्रतिशत लोग
भारतीय हैं और उन भारतीयों में से 65 प्रतिशत हिंदू हैं, जिनमें
से 70 प्रतिशत वैश्य समाज से हैं। उन्होंने कहा कि वहां के
वैश्य समाज के लोग गर्व से अपने आप को ‘वैश्य’ बताते हैं तथा
हमें उनसे सीख लेने हेतु इस दिशा में कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वैश्य एकता के द्वारा ही समाज का कल्याण होगा
तथा समाज के सभी घटकों को इस दिशा में कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दो दिवसीय चिंतन बैठक के दौरान महासम्मेलन की
भविष्य की नीति, योजना व रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जायेगी।
महासम्मेलन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रजनी रंजन साहू ने अपने
संबोधन में कहा कि वैश्य समाज को राजनीतिक क्षेत्र में अपनी
जगह मजबूत बनाने हेतु कार्य करना चाहिए, तभी समाज की आवाज
बुलंद होगी और हमें सम्मान मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि देश के
वैश्य यह चाहते हैं कि कोई उन्हें जगाएं और उनका मार्गदर्शन करें।
उन्होंने कहा कि सदियों से वैश्य समाज का शोषण किया जा रहा है,
उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। हमें इस स्थिति में
परिवर्तन लाना होगा और यह तभी संभव हो पाएगा, जब हम एकजुट होकर
कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि हमें समाज के लोगों को जोड़ना
होगा और प्रांतीय संगठनों से तालमेल बनाना होगा, तभी हम सफल हो
पाएंगे। उन्होंने डॉ. गिरीश कुमार संघी द्वारा समाज को एकजुट
करने हेतु किए जा रहे प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए
कहा कि उन्होंने वैश्य समाज का दायरा बड़ा किया है तथा वैश्य
समाज के सभी घटकों को जोड़ने का प्रयास प्रारंभ कर महत्वपूर्ण
कार्य किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. संघी द्वारा प्रारंभ किये
गये ‘गर्व से कहो हम वैश्य हैं’ अभियान को समाज के लोगों से
अच्छी प्रतिक्रिया प्राप्त हो रही है तथा इसने समाज में क्रांति
लाने का कार्य किया है। श्री प्रदीप मित्तल ने कहा कि वैश्य
समाज को राजनीतिक क्षेत्रा में अपने आप को और मजबूत बनाने का
प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि महासम्मेलन के प्रयासों के
कारण वैश्य समाज में चेतना आयी है तथा समाज के घटक एक दूसरे से
जुड़ने व सहयोग करने का प्रयास कर रहे हैं। रवि पटवा ने अपने
संबोधन में कहा कि हमारा लक्ष्य 2014 का चुनाव होना चाहिए तथा
हमें अपने को वर्तमान राजनीति विकल्प के रूप में तैयार करना
होगा, तभी सत्ता हमारे हाथों में आ पाएगी। महासम्मेलन के
वरिष्ठ उपाध्यक्ष गंजी राजमौली गुप्ता ने दक्षिण व उत्तर के
वैश्य समुदायों को एक मंच पर लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
महासम्मेलन के राष्ट्रीय महासचिव बद्रीविशाल बंसल ने कहा कि
महासम्मेलन के कार्यों को किस प्रकार से मंडल स्तर तक ले जाया
जा सकता है, इस विषय पर गहराई से चर्चा किऐ जाने की आवश्यकता
है। उन्होंने बताया कि महासम्मेलन की गतिविधियों को देश तक ही
सीमित न रखते हुए विदेशों में भी इसे ले जाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि महासम्मेलन की शाखाएं बैंकाक, टोरंटो व
न्यूयार्क में भी सक्रिय हैं तथा दुबई व मॉरिशस में भी शीघ्र
ही शाखाएं खोली जायेंगी। महासम्मेलन के अंतर्राष्ट्रीय
कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. दाऊजी गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन में कहा
कि वैश्य समाज को चाहिए कि वह अपने सदस्य को प्रधनमंत्री की
कुर्सी पर आसीन करने हेतु प्रयास करे। महासम्मेलन के राष्ट्रीय
युवा अध्यक्ष गोपाल मोर ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर
पर महासम्मेलन के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल, व.
उपाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता, चंद्रप्रकाश वर्मा, ग्रेटर हैदराबाद
वैश्य महासम्मेलन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल, आंध्र प्रदेश महिला
अध्यक्ष भारती खंडेलवाल, सुरेश जगनानी, अमरवाड़ी लक्ष्मीनारायण,
सुरेशचंद्र गुप्ता, उत्तम प्रकाश, अशोक कुमार टिबरेवाल, रमेश
गुप्ता, अजय गुप्ता, ए.के. गोयल, दिनेश बलदेव, विजयलक्ष्मी
काबरा, जगदीश प्रसाद, कोटेश्वर राव आदि उपस्थित थे। |
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